Saturday, December 13, 2008

आज बहुत बुरा दिन था, बाबरी मस्जिद की १६वी बर्सी का केक भी नही काटा

9/11 के बहाने से अफ़ग़ानिस्तान की खूब ठोकदी थी अब मुंबई के 26/11 को लेकर पाकिस्तान पर चढाई का बहाना भी मिलगया। मगर भारत किसी खुशफ़हमी मे ना रहे, क्योंकि आखिर मे इसको भी हिसाब चुकाना है। हम जिस जिस को अपनी गोदी मे बिठाते हैं बाद मे ज़बर्दस्ती अंडा देने के लिए उसका मुर्ग़ा भी बना डालते हैं। हमारा सलाम है उन जांबाज़ आतंकवादीयों पर जो बडी चालाकी से मुंबई आए, बडे बहादुर थे कि मरने और मारने के लिए आए और अपने मक़सद मे कामयाब होकर उनकी मृत्यु भी होगई। बहुत अच्छा किया जो इन्की हत्या करदी गई वरना एकएक की पोल खुलजाती। वैसे भी हम सच्ची मुच्ची के ख़ुदा हैं, अगर इजाज़त हो तो सभी राज़ फ़ाश करदें। हम सब जानते हैं आख़िर हम ख़ुदा हैं।

2 टिप्पणियाँ:

Suresh Chandra Gupta said...

प्रेम करो नफरत नहीं. नफरत करने वाला खुदा नहीं होता.

विवेक सिंह said...

ओह कुछ हटके .

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