परमेश्वर की खुदाई की शान और उसका एहसान, धन्यवाद मेहरबान, सब तेरी इज्जत
और इकराम, नहीं कोई तुझ से न तो किसी से, तो सक्षम तो निर्माता तो प्राणी,
तो भगवान सब कुछ तो ही तो,
मुफ्त का चंदन घिस मेरे लाला
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हर चीज सबके लिए नहीं होती। यह बात तिवारी जी को तब समझ आई जब जोश जोश में
मोहल्ले के पार्क में वो भी सबकी देखा देखी योगा दिवस के दिन योगा करने पहुँच
गए।...




