परमेश्वर की खुदाई की शान और उसका एहसान, धन्यवाद मेहरबान, सब तेरी इज्जत
और इकराम, नहीं कोई तुझ से न तो किसी से, तो सक्षम तो निर्माता तो प्राणी,
तो भगवान सब कुछ तो ही तो,
तुम आदत में शुमार हो मेरी
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प्याली से उठती भाप
जाने कहाँ खो गई
चाय की उस आखिरी
चुस्की के साथ
मगर चाय का स्वाद
घुल रहा है अब भी
जुबान पर मेरी
और नथुनों में बस रही है
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