तुम आदत में शुमार हो मेरी
-
प्याली से उठती भाप
जाने कहाँ खो गई
चाय की उस आखिरी
चुस्की के साथ
मगर चाय का स्वाद
घुल रहा है अब भी
जुबान पर मेरी
और नथुनों में बस रही है
अदरक की...
Saturday, October 25, 2008
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Write in to your own language
1

0 टिप्पणियाँ:
Post a Comment