तुम आदत में शुमार हो मेरी
-
प्याली से उठती भाप
जाने कहाँ खो गई
चाय की उस आखिरी
चुस्की के साथ
मगर चाय का स्वाद
घुल रहा है अब भी
जुबान पर मेरी
और नथुनों में बस रही है
अदरक की...
Saturday, December 13, 2008
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