मुफ्त का चंदन घिस मेरे लाला
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हर चीज सबके लिए नहीं होती। यह बात तिवारी जी को तब समझ आई जब जोश जोश में
मोहल्ले के पार्क में वो भी सबकी देखा देखी योगा दिवस के दिन योगा करने पहुँच
गए।...
Monday, January 05, 2009
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1 टिप्पणियाँ:
केशराशी चित्ताकर्षक है, मगर आज की परकटियों को क्या ?:)
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