सबसे ऊपर बैठा आसमान से बातें कर रहा है। जी नहीं काम मे व्यस्त है
कोई आखिर इतना खा कैसे सकता है?
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जब कभी घर पर पकोड़ी वाली कढ़ी बनती है तो पकोड़ी तल कर निकलते ही दो चार पकोड़ी
यूँ ही खा जाना आम सी बात है। इसका कोई बुरा भी नहीं मानता बल्कि ऐसा ही होता ...

1 टिप्पणियाँ:
मुझे तो देख कर चक्कर आ गया.
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