तुम अनंत हो
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तुम अनंत हो -----------------
मैं रेत पर लिखता हूँ अपना नाम और
फिर देर तक उसमें खोजता हूँ तुमको!
तुम दिखने ही वाली थी कि
आकर एक लहर पोंछ जाती है मु...
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1 टिप्पणियाँ:
अनुपम, अवर्णनीय,अतुलनीय....दिल खुश हो गया इतनी सुन्दर नक्काशी देख कर...बस देखती ही रह गई...बहुत खूब संग्रह है....बधाई...
डा.रमा द्विवेदी
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