कोई आखिर इतना खा कैसे सकता है?
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जब कभी घर पर पकोड़ी वाली कढ़ी बनती है तो पकोड़ी तल कर निकलते ही दो चार पकोड़ी
यूँ ही खा जाना आम सी बात है। इसका कोई बुरा भी नहीं मानता बल्कि ऐसा ही होता ...
Friday, March 27, 2009
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1 टिप्पणियाँ:
तो अदभुत संसार रच जाता है :) सुन्दर
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