मुफ्त का चंदन घिस मेरे लाला
-
हर चीज सबके लिए नहीं होती। यह बात तिवारी जी को तब समझ आई जब जोश जोश में
मोहल्ले के पार्क में वो भी सबकी देखा देखी योगा दिवस के दिन योगा करने पहुँच
गए।...
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Write in to your own language
1

2 टिप्पणियाँ:
कुछ मजेदार, कुछ बनाई हुई और कुछ शरारती अश्लीलता लिए हुए.
संजय से सहमत। सभी बनाई हुई।
Post a Comment