कोई आखिर इतना खा कैसे सकता है?
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जब कभी घर पर पकोड़ी वाली कढ़ी बनती है तो पकोड़ी तल कर निकलते ही दो चार पकोड़ी
यूँ ही खा जाना आम सी बात है। इसका कोई बुरा भी नहीं मानता बल्कि ऐसा ही होता ...
Wednesday, September 02, 2009
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2 टिप्पणियाँ:
इस कार्यक्रम को टीवी पर देखा था. ऐसा ही अफगानिस्तान पर भी था, उसे भी देखा था. पाकिस्तान का नाम आते ही मम्मी के मुँह से :मम्मीई ई ई" क्यूँ निकला है? :)
HA HA . DAR LAGTA HAI :D
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