मुफ्त का चंदन घिस मेरे लाला
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हर चीज सबके लिए नहीं होती। यह बात तिवारी जी को तब समझ आई जब जोश जोश में
मोहल्ले के पार्क में वो भी सबकी देखा देखी योगा दिवस के दिन योगा करने पहुँच
गए।...
Thursday, July 17, 2008
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2 टिप्पणियाँ:
ye sacch main bahut accha hai ...aap ka shukriya..
बडा विहंगम दृष्य है, आभार.
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