मुफ्त का चंदन घिस मेरे लाला
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हर चीज सबके लिए नहीं होती। यह बात तिवारी जी को तब समझ आई जब जोश जोश में
मोहल्ले के पार्क में वो भी सबकी देखा देखी योगा दिवस के दिन योगा करने पहुँच
गए।...
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4 टिप्पणियाँ:
:) सचमुच ऐसा हो सकता है?!!
वाह! क्या सदुपयोग है! जबर्दस्त !
घुघूती बासूती
ha ha ha ..mast hai ji.
PAHLE AADMI PAHNEGA FIR AAURAT
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