कोई आखिर इतना खा कैसे सकता है?
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जब कभी घर पर पकोड़ी वाली कढ़ी बनती है तो पकोड़ी तल कर निकलते ही दो चार पकोड़ी
यूँ ही खा जाना आम सी बात है। इसका कोई बुरा भी नहीं मानता बल्कि ऐसा ही होता ...
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4 टिप्पणियाँ:
:) सचमुच ऐसा हो सकता है?!!
वाह! क्या सदुपयोग है! जबर्दस्त !
घुघूती बासूती
ha ha ha ..mast hai ji.
PAHLE AADMI PAHNEGA FIR AAURAT
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