और बड़े कमाल का है ज़रा ग़ौर से देखें।
कोई आखिर इतना खा कैसे सकता है?
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जब कभी घर पर पकोड़ी वाली कढ़ी बनती है तो पकोड़ी तल कर निकलते ही दो चार पकोड़ी
यूँ ही खा जाना आम सी बात है। इसका कोई बुरा भी नहीं मानता बल्कि ऐसा ही होता ...

5 टिप्पणियाँ:
Excellent informative graphics. Enjoyed it.
है तो वाकई कमाल का. आभार.
सच में शानदार, कमाल का ग्राफ़िक्स.
धन्यवाद.
क्या कुस्ती है।
कल और आज के ब्राउजर्स को रोचक ढंग से चित्रित किया है.
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