और बड़े कमाल का है ज़रा ग़ौर से देखें।
तुम आदत में शुमार हो मेरी
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प्याली से उठती भाप
जाने कहाँ खो गई
चाय की उस आखिरी
चुस्की के साथ
मगर चाय का स्वाद
घुल रहा है अब भी
जुबान पर मेरी
और नथुनों में बस रही है
...

5 टिप्पणियाँ:
Excellent informative graphics. Enjoyed it.
है तो वाकई कमाल का. आभार.
सच में शानदार, कमाल का ग्राफ़िक्स.
धन्यवाद.
क्या कुस्ती है।
कल और आज के ब्राउजर्स को रोचक ढंग से चित्रित किया है.
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